‘डबिडी डिबिडी’ गीत पर विवाद: महिलाओं की सुरक्षा के बीच फिल्मों में अश्लीलता क्यों बनी मनोरंजन का पैमाना?
‘डबिडी डिबिडी’ का शाब्दिक अर्थ ढोल की थाप को दर्शाने के लिए किया गया है, लेकिन इस गाने में इसे बेहद आपत्तिजनक संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है. तेलुगु बोलों में यह पंक्ति आती है:
नई दिल्ली। एक ऐसे देश में जहां महिलाएं अपने घरों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं ‘डबिडी डिबिडी’ जैसे गानों का आना महिलाओं के सम्मान के प्रति एक गहरी संवेदनहीनता दर्शाता है. जॉर्जटाउन इंस्टीट्यूट के 2023 वुमेन, पीस एंड सिक्योरिटी इंडेक्स में भारत 177 देशों में से 128वें स्थान पर है, जो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक स्थिति उजागर करता है.
महिलाएं जहां अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लड़ रही हैं, वहीं मुख्यधारा का सिनेमा लगातार ऐसे गीत प्रस्तुत कर रहा है जो न केवल महिलाओं का वस्तुकरण करते हैं, बल्कि मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता को सामान्य बनाने का काम भी करते हैं. इस प्रवृत्ति का ताज़ा उदाहरण है तेलुगु फिल्म ‘डाकू महाराज’ का गाना ‘डबिडी डिबिडी’, जो अपने तेज़ बीट्स और आकर्षक नृत्य के बावजूद आपत्तिजनक बोलों और अश्लील इशारों से भरपूर है.
मनोरंजन की आड़ में अश्लीलता?
पहली नज़र में ‘डबिडी डिबिडी’ एक हाई-एनर्जी पार्टी सॉन्ग लगता है, जिसमें तेज़ संगीत, भड़कीले दृश्य और उन्मादी नृत्य देखने को मिलता है. लेकिन इसके बोलों पर गौर करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह गीत केवल सतही आनंद के लिए नहीं बना, बल्कि इसमें छिपे द्विअर्थी संवाद और भद्दे संकेत इसे बेहद आपत्तिजनक बनाते हैं.
नंदामुरी बालकृष्ण और उर्वशी रौतेला पर फिल्माए गए इस गीत में ऐसी भाषा और कोरियोग्राफी है जो महिलाओं को सिर्फ एक आकर्षक वस्तु के रूप में पेश करती है. फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर उर्वशी रौतेला की पीआर रणनीति और बयानबाज़ी पहले ही इस फिल्म को चर्चा में ला चुकी थी, लेकिन जब यह गाना ओटीटी पर आया, तो इसे नज़रअंदाज करना मुश्किल हो गया.
गीत के बोलों में छिपा आपत्तिजनक संदेश
‘डबिडी डिबिडी’ का शाब्दिक अर्थ ढोल की थाप को दर्शाने के लिए किया गया है, लेकिन इस गाने में इसे बेहद आपत्तिजनक संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है. तेलुगु बोलों में यह पंक्ति आती है:
“ए डबिडी डिबिडी डबिडी डिबिडी नी चेय्यिए एत्तू बाला! ए डबिडी डिबिडी डबिडी डिबिडी ना चेम्पामोकेपोयेला!”
इसका मोटे तौर पर हिंदी में अर्थ होगा: “डबिडी डबिडी, हाथ तो उठा दे बाला! डबिडी डबिडी, थप्पड़ तो सही से मार न बाला!”
इसमें छिपा अश्लील संकेत किसी से छिपा नहीं है. यही नहीं, यह गाना आम जनता के बीच इतनी सहजता से फैल गया है कि लोग अनजाने में इसे गुनगुनाने लगे हैं, यह समझे बिना कि इसके बोल महिलाओं के वस्तुकरण और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं.
सवाल उठाने का समय आ गया है
बड़े पैमाने पर देखी जाने वाली फिल्मों और गानों की ज़िम्मेदारी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे समाज में गहरे प्रभाव भी छोड़ते हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या महिला सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई के बीच इस तरह के गीतों को सामान्य माना जाना चाहिए? जब तक इस पर गंभीर चर्चा नहीं होगी, तब तक सिनेमा की यह प्रवृत्ति बदलेगी नहीं.